वैसे, औरतों के पक्ष में यह बात तो जाती है
बेवजह दुनिया उनकी राह में कांटे बिछाती है
क्यों हंसी, क्यों बोली, क्यों देखा किसी को
जासूस है ये दुनिया, नजरों के पहरे लगाती है
गर थोड़ी देर हो जाए औरत को घर आने में
दुनिया की काली शख्शियत उंगलिया उठाती है !!
न सजे संवरे तो मनहूस, खूब सजे तो ‘संदेह’
कौन क्या कहेगा ये बात उसे हर वक्त डराती है
लग ही जाते हैं दामन पर बेहुदे दाग
भले ही औरतें खुद को कितना ही बचाती है !!?!!
बेवजह दुनिया उनकी राह में कांटे बिछाती है
क्यों हंसी, क्यों बोली, क्यों देखा किसी को
जासूस है ये दुनिया, नजरों के पहरे लगाती है
गर थोड़ी देर हो जाए औरत को घर आने में
दुनिया की काली शख्शियत उंगलिया उठाती है !!
न सजे संवरे तो मनहूस, खूब सजे तो ‘संदेह’
कौन क्या कहेगा ये बात उसे हर वक्त डराती है
लग ही जाते हैं दामन पर बेहुदे दाग
भले ही औरतें खुद को कितना ही बचाती है !!?!!

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