बिना सन्दर्भ, प्रसंग के
आरोप-प्रत्यारोप का दौर है
राम पत्नी उत्पीड़क
कृष्ण स्त्रीलोलुप घनघोर है...
बिना गहन अनुसन्धान के
भ्रामक निष्कर्ष निकाल दिए हैं
उद्धारक और परम त्यागी पर
वीभत्स आक्षेप डाल दिए हैं ....
तुलसी सामंतों के पक्षधर
स्त्री स्वातन्त्र्य के प्रतिकारक थे
कहने वालों ने कह दिया
तुलसी पिछड़ेपन के प्रचारक थे ....
कहानियों पर कहानियाँ
रोज-ब-रोज बनती जाती है
मूल कथा पर कल्पना की परतें
रोज-ब-रोज चढ़ती जाती हैं ...
हजारों हजारों वर्षों में
भ्रांतियों पर भ्रांतियां बढ़ती जाती हैं
तुलसी ने मानस का उपहार दिया
मानस ने जग का उद्धार किया
वाल्मीकि की मूल कथा में
मर्यादा पुरुषोत्तम राम थे ...
वेदव्यास की मूल कथा में
गीता के प्रतिपादक श्याम थे .

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