तुम वोट हो बस इसलिए चर्चाओं में जिंदा हो
किसान ! तुम राजनीतिक सदाओं में जिंदा हो
तुम मर गये तुम्हारी तस्वीर पे माला है मगर
सत्ता बदलने के लिए आम सभाओं में जिंदा हो !!
लोकतंत्र न होता तो तुम्हें कौन पूछता भला
तुम मगरमच्छी आंसुओं के बहाओं में जिंदा हो
मंडियां रोशन हैं मगर घर का दीप बुझ गया
तुम बेवा बीवी बेबस बूढी माँ की आहों में जिंदा हो
यहाँ तुमने बीज बोकर पसीने से सींचा था
बजरिये मेहनत की खुश्बू तुम हवाओं में जिंदा हो !!?!!
किसान ! तुम राजनीतिक सदाओं में जिंदा हो
तुम मर गये तुम्हारी तस्वीर पे माला है मगर
सत्ता बदलने के लिए आम सभाओं में जिंदा हो !!
लोकतंत्र न होता तो तुम्हें कौन पूछता भला
तुम मगरमच्छी आंसुओं के बहाओं में जिंदा हो
मंडियां रोशन हैं मगर घर का दीप बुझ गया
तुम बेवा बीवी बेबस बूढी माँ की आहों में जिंदा हो
यहाँ तुमने बीज बोकर पसीने से सींचा था
बजरिये मेहनत की खुश्बू तुम हवाओं में जिंदा हो !!?!!
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