तो थी ना तुझको कि मैं तेरे प्यार में हूँ
बहुत ही दूर किनारे हैं और मैं मझदार में हूँ
अब तक तो ख्वाबों में भी नहीं आई तू मेरे
सदियाँ बीत गईं सदियों से मैं इन्तजार में हूँ
छालों का पूरा जंगल उग आया है दिल में मेरे
आ रहा दहकने में मजा, मैं मीठी अंगार में हूँ
तुम्हारी निगाहों के जादू से आ जाती है बहार
इक नजर इधर भी देख लो कब से कतार में हूँ
प्यार करना गुनाह है तो अपराध कुबूल है
चाहो सजा दो चाहो इनाम तुम्हारे दरबार में हूँ
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