पिया के घर उम्मीदें बहुत सारी ओढ़कर आई थी
बदले में मैं माँ की गोद प्यारी छोड़कर आई थी
मन के पैरों से दिल की नगरी में दौड़कर आई थी
नये जीवन के नये समीकरण जोड़कर आई थी
जिंदगी की किताब के अधपढ़े पन्ने मोड़कर आई थी
सब गलियों से पुरानी पहचान तोड़कर आई थी
सोचा था पियाजी थाम लेंगे मुझे बलिष्ठ बाहों में
चुनेंगे पलकों से कांटे जो भी आयेंगे मेरी राहों में
सास ससुर रखेंगे मुझको प्यारे तारे सा निगाहों में
ननद-देवर-जेठ होंगे मेरे सबसे अच्छे खैरख्वाहों में
इंद्रधनुषों से आलिंगन था मेरी मासूम चाहों में
केवल मेरी धड़कनें थीं मेरे ख़्वाबों की गवाहों में
पहन के हीरे, मोती, सोना चमचम चमकुंगी मैं
पिया के प्यार के चन्दन से मोहक महकुंगी मैं
चूड़ी, कंगन, बिछिया बनकर बहुत खनकुंगी मैं
रोशन होकर सूरज सी आंगन में दमकुंगी मैं
बनके पिया के दिल की धड़कन धड़कुंगी मैं
ख्वाब कहाँ पूरे होते हैं, मेरे भी सब टूट गये
स्वप्न महल कांच के थे एक पल में फूट गये
खुद पिया मुझे जमीं से मिटाने में जूट गये
रात बाहों में कसने वाले हाथ मुझपर उठ गये
दहेज़ जुटाने में बेचारे मम्मी पापा लूट गये
किसी ने नहीं पूछा क्या क्या छोड़कर आई हो
सबने पूछा दुल्हन संग में क्या- क्या लाई हो
किसी न चाहा सोना किसी ने कार को चाहा था
सात फेरों के बदले अक्खे बाज़ार को चाहा था
सुबह शाम भोजन में सास की मार मिलने लगी
ननद से हर पल कुत्तों वाली दुत्कार मिलने लगी
ससुर हरदम कटोरा लेकर ललचाये हुए खड़े थे
मेरे पापा के घर भला कहाँ पैसे वाले पेड़ गड़े थे
मैंने मौत चुनी आज मेरा अंतिम संस्कार होगा
प्रश्न है कब तक विवाह के नाम पे व्यापार होगा
आज मैं मरी हूँ कल मेरे बहन का क्रम आएगा
ऐ मौला तेरे बन्दों को क्या कभी रहम आएगा
विदा! अलगे जनम में शायद दुनिया बदल जाए
मुझ जैसों का बेमौत मरने का हादसा टल जाए
कुछ यूँ लिखो को सोच का विस्तार हो
आदमी को दौलत से ज्यादा आदमी से प्यार हो !!?!!

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