कभी कुरते में कभी साड़ी में नज़र आती है
वो मेरे ख़्वाबों में, अक्सर मेरे घर आती है
बस एक दफ़ा छुआ था उसने मासूमियत से
आज तक हथेली से चंदन की लहर आती है
इश्क के इतिहास का मजमून है बस यही
इक बार मोहब्बत फिर पुराने शहर आती है
बड़े से बड़े दर्द के बाद भी जो रहता है जिंदा
एक दिन उसके हिस्से अच्छी खबर आती है
उसकी याद में भीगा रहता हूँ हरदम
आँखों से आंसुओं की ‘मीठी’ नहर आती है !!?!!
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