पढ़ने लिखने के दौर में कोई और चाह न करना
बिटिया किसी आकर्षण में पढ़कर गुनाह न करना
वैसे भी अब प्यार पूजा नहीं बस कामना हो गया
किसी लम्पट की बातों में खुद को तबाह न करना
क्लीनशेव भेड़िये घूमते हैं सजधजकर इन दिनों
माँ बाप की मर्जी बिना किसी से विवाह न करना
केवल लक्ष्य पर निगाहें रखना अर्जुन की तरह
आए दिन मिलेंगे ‘प्रपोजल’ तुम परवाह न करना
माँ-बाप बूढ़े होकर अब असहाय भी होंगे
काली करतूतों से उनके लिए कंटीली राह न करना !!?!!

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