ज़माने में बुरा है घोड़ा और भला है गधा होना
कोईं यूँ ही नहीं गधा होता, कला है गधा होना
हर तरफ गधे सिरमौर हैं कहीं भी देख लीजिये
सब नहले रह जाते हैं पर दहला है गधा होना
घोड़ेपन का हासिल है चाबुक खाओ दौड़ते रहो
जन्मों . के पूण्य कर्म का बदला है गधा होना
घोड़े ढालने वाला विभाग बंद पड़ा है कब से
आजकल सभी का मकसद पहला है गधा होना
गुलाब जामुन खाओ और मजे से टहलो
कोई लाख कहे दिमाग से उथला है गधा होना !!?!!

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