मैंने लोगों को सर पत्थर पे रख के सोते देखा है
उन्हें ग़ुरबत से मैंने टूटते और रोते देखा है
तुम्हारा पेट भर जाए तो रोटी फेंक देते हो
वहीं लोगों का जीवन भूख से भी खोते देखा है|

तुम्हें ना धूप की परवाह, ना सोचो गर्मी-सर्दी की
जो दौलत से हो पूरे तुम करोगे अपनी मर्ज़ी की
ज़रा कपड़े भी सिलवाओ तो भर दो जेब दर्ज़ी की
और उनको एक ही जामा सुखाते-धोते देखा है|
तुम्हारे घर के बच्चे भी सुखी जीवन बिताते हैं
फलक पर पाँव रख कर के सितारे तोड़ लाते हैं
ना खोते हैं वो खुशियों को, ना बचपन को गवाते हैं
और उनके बच्चों के बचपन को ज़ाया होते देखा है|
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Learn to give credits when you're not posting your own content. You'll face a case of plagiarism soon. Already warned you but I still see it here ... Just wait and watch
Balas