Tumhare Khwab M Hai Kaun तुम्हारे ख्वाब में है कौन


बस इक ही निगाह से, वो ग़ज़लें हज़ार कह देती है
जो ग़ालिब जैसे न कह पाये वो हर बार कह देती है
बिखेरती है जुल्फ़ें तो हो जाते हैं कलाम अनगिनत
पढना चाहे गर कोई, तो बस खबरदार कह देती है
उसके आते ही महफिलें बदल जाती हैं मुशायरों में
बिना लब खोले ही वह प्यारे अशआर कह देती है
कौन हैं शागिर्द तुम्हारे किनने सीखी तुमसे शायरी
पड़े तो हुए हैं इधर उधर सैकड़ों गुलज़ार कह देती है
तुम सबके ख़्वाबों में हो, तुम्हारे ख्वाब में है कौन
वो शरमाकर तुम्हारा है इंतजार कह देती है..!!?!!
Previous
Next Post »
0 Komentar