Mere Pass Maa HAI



बेटों, तुमने मेरी स्तुति की, मेरा मान रखा ..
देवों से पहले रख, मेरा बड़ा सम्मान रखा ....
मेरे त्याग, समर्पण और परिश्रम को सराहा ..
मेरे अस्तित्व पर सबने बड़ा अभिमान रखा ...
मेरे आँचल में सूरज शीतलता पाता, वाह!!
कवियों ने महाकाव्यों में मेरा गुणगान रखा ...
भावप्रवण संतानों ने श्रद्धा का संसार रचा ...
घरमंदिर में उनने मेरा नाम भगवान् रखा ...
अपने सिर पर सदा मेरे साए की कामना की .
'मेरे पास माँ है' कहकर स्वाभिमान रखा ...
तुमसे मैं हूँ, मुझसे तुम हो, कैसा अद्वैत है ...
जेब खाली पर, भावनाओं में धनवान रखा .....
मैंने तुम पर अपना सर्वस्व न्योछावर किया ...
वर्षों तक तुमको हर पीड़ा से अनजान रखा ...
तेरे पहले आसमाँ को जीतना चाहती थी ....
तू आया तो जग भूली तेरा ही ध्यान रखा
जब मैं वृद्धा होकर, दुर्बल और लाचार बनी ...
तुमें सिर आँखों पर मेरा हर फरमान रखा 
पहले मैंने, फिर तूने सहारे का हाथ बढाया ..
जग ने माँ-बेटे के रिश्ते का नाम वरदान रखा ..!!?!!
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