बस... एक नजर तू खिड़की से ही देख ले
दरवाजे पर खड़ी हु , कब से आई हूँ ।
मानती हु तुझे डर है ज़माने का, पगले बस तेरा हाल ही जानने आई हूँ ।
तू चाहे कुछ न कहना , सारा हाल आखों से बयां कर जाना
और तेरे बिन कैसे कट रहे है मेरे दिन ... मेरे आखों को देख के समझ जाना
कि तुझे ये समझाने के लिए अपनी आँखें भी सुजा लायी हु
सुन... आ जाना अभी भी दरवाजे पर खड़ी हु , कब से आई हूँ ।

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