सुबह की सुनहरी धूप, शाम की लाली तुझसे है
तू रात की चांदनी, मेरी हर खुशहाली तुझसे है
जहाँ जाता हूँ वहां मिलती है छांह मीठी मीठी
जलते दौर में मेरे जीवन की हरियाली तुझसे है
मेरे ख़्वाबों ख्यालों में तेरे बसने का है या हासिल
गीत तुझसे, ग़ज़ल तुझसे, ये कव्वाली तुझसे है
यूँ जी उठा हूँ कि अब मरना मुमकिन ही नहीं
तेरी कसम सचमुच ये अमृत की प्याली तुझसे है
तूने सजाया, संवारा, निखारा है बहुत मुझे ‘मधु’
मेरे लिए बज रही प्रशंसा की हर ताली तुझसे है !!?!!

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