वो मील के पत्थर बन भावी पीड़ी के लिए गड़े थे

मील के पत्थर


ये बेमतलब है कि शुरू में आप छोटे थे या बड़े थे

मायने इस बात के हैं कि अंत में आप कहाँ खड़े थे !

जीत या हार आनी जानी है नदी के पानी की तरह

इतिहास यह देखता है कि आप जी-जान से लड़े थे !!

राह पर खून से बने पदचिन्ह सुनाते हैं संघर्ष गाथा

पगडंडियों पर लगी ठोकरों से कितनी बार पड़े थे

जो मिलता है वो भी चिर-स्थाई नहीं रहता है कभी

अनगिनत सिकंदरों के नामपट राजद्वारों से उखड़े थे

जिन्होंने समझ लिए छोटी सी जिंदगी के अर्थ
वो मील के पत्थर बन भावी पीड़ी के लिए गड़े थे !!?!!
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