दशरथ कष्ट में है कैकेयी, पत्नी धर्म का पालन करो
अभी भी है वक्त बहुत अपने पाप का प्रक्षालन करो
जिस पति ने पुत्र दिया भला उसका धिक्कार क्यों
पति से नहीं, केवल उसकी सम्पत्ति से प्यार क्यों
ठुकरा दो मंथराओं को जिनने ब्रेन वाश कर दिया
कल इतिहास ये न कहे तुमने सत्यानाश कर दिया
पहले पति फिर पुत्र, शास्त्र यही है और धर्म यही है
पति के लिए यम से लड़ बैठे पत्नी का कर्म यही है
राजपाट आने-जाने, ये ज़िन्दगी फिर नहीं आयेगी
गर मर गये दशरथ तो दुनिया को क्या समझायेगी
लिपट जाओ दशरथ से कहो मुझे सिर्फ आप चाहिए
अनाथ कर के न जाओ भरत को प्रिय बाप चाहिए
जिसको जो देना है दे दो, बस तुम मेरे ही रहना
दिल में बसाकर मुझे, बाहों में तुम घेरे ही रहना
त्रेता में जो हुआ वो कलियुग में होने न पाये
सम्पत्ति की चाह में कोई पुत्र पिता को खोने न पाये!!?!!

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