KAR LO DUNIYA MUTHTHI M HAI APME WO TAKAT


गिरो, पड़ो, सम्भलो फिर तेज रफ़्तार कर लो
मुट्ठी का विस्तार कर मुट्ठी में संसार कर लो
रब ने बनाया है तुम्हें तुम दुनिया में खास हो
खुद को संवारकर खुद से अनंत प्यार कर लो
कायरता, कापुरुषता, घबराहट का पसीना क्यों
आत्मबल से अपनी कमियों पर प्रहार कर लो
तुम ही जीतोगे बेफिक्र होकर कूद पड़ो मैदान में
वक्त के हमलों के लिए खुद को तैयार कर लो
नयी सुबह, नया सूरज, नयी किरणें हैं
दीप बन कर जल उठो दूर अन्धकार कर लो !!?!!
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