दिल पे लगे घावों का ईनाम. है ग़ज़ल
बस आंसुओं का लिखना काम है ग़ज़ल
इश्क जारी हो तो लफ्ज ही नहीं जुड़ते
दो मोहब्बतों के बीच विश्राम है ग़ज़ल
क्यों न मखमली मखमली महसूस हो
बहुत .प्यारे रिश्तों की शाम है ग़ज़ल
ये मिलती है तो चमक उठता है वजूद
जीवन यात्रा का अहं मुकाम है ग़ज़ल
हर किसी के बस की बात नहीं है
मांगती बहुत ही ज्यादा दाम है ग़ज़ल !!?!!

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