न ही घुड़सवारी , न बाँहों को फैलाते हुए

न ही घुड़सवारी , न बाँहों को फैलाते हुए हीरो हौंडा की बेक सीट पर बेठना
यहाँ तक की मारुती में लोंग ड्राइव न भाये मुझको
मुझको तो भाता है तेरा मेरा साथ चार कदम चलना।
दुनिया के रस्मों रिवाज को साइड में रखते हुए
इस भीड़ भाड़ भरे बाजार में होते हुए
अनगिनत है जो , तेरी मेरी बातों में खोते हुए
मैं दूर.......मीलों तक युहीं चल देती हूँ , 

यकीन नहीं आता ये मैं हु जो कुछ दूर के लिए ही रिक्शा कर लेती हु ।
पसंद आती हैं मुझे चलते हुए ये टक्करें तेरे मेरे बीच की,
पसंद आती है मुझे मेरी ख़ामोशी और तेरी बातें तेरे ही उसूल की
पसंद आता है मुझे तेरा यूँ हाथ थामकर रास्ते पार कराना
पसंद आता है मुझे तेरे साथ बेवजह मेरा मुस्कुराना
पर ये मुस्कराहट मेरी फीकी पडती जाती है
क्यूंकि डर महसूस होता है तेरे दूर चले जाने का
जब तू मुड़ता है उन राहों पर जो रास्ता है वापस घर जाने का ।
न ही घर की चार दीवारियाँ , न ही सोफे पर बैठकर घंटो टीवी देखना
ये मोबाइल ,ये टेक्नोलॉजी भी न भाये मुझको
मुझको तो भाता है तेरा मेरे साथ चार कदम चलना ।।
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