The woman could not be alive- औरत जिंदा न हो सकी



न उष्णता थी और न महक जब गले लगाकर देखा
सारी उमर हमने पाषाण प्रतिमा से टकराकर देखा
कोशिशें की, लेकिन औरत जिंदा न हो सकी बुत में
खूब गाल खींचे और पसलियों को गुदगुदाकर देखा
व्रत, तीज, त्यौहार और गले में लंबा मंगलसूत्र मगर
आँखें सूनी सूनी ही रही, हजारों बार मुस्कुराकर देखा
सर्दी, गर्मी, दुःख, पीड़ा, आंधी-तूफ़ान आकर चले गये
आँखों से आंसू भी न निकले बहुत दिल दुखाकर देखा
जब तक यकीन जिंदा हो इंसान जिंदा रहता है
वो खोया हुआ विश्वास न लौटा गंगाजल उठाकर देखा !!?!!
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